मंगल पर मिला 3.5 अरब साल पुराना ‘बीच’ नासा के रोवर ने खोजा सबसे पुख्ता सबूत

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नई दिल्ली। मंगल ग्रह पर जीवन के पुराने संकेतों की तलाश में वैज्ञानिकों को एक बड़ी और अहम कामयाबी मिली है। नासा के परसिवियरेंस रोवर ने मंगल पर एक ऐसे प्राचीन समुद्र तट के प्रमाण खोजे हैं, जहां करीब साढ़े तीन अरब साल पहले एक विशाल झील मौजूद थी । यह खोज मंगल के जेजेरो क्रेटर इलाके में हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वही जगह है, जहां कभी पानी की लहरें किनारे से टकराती थीं । इससे यह साफ होता है कि मंगल पर कभी लंबे समय तक पानी मौजूद रहा होगा । पानी की मौजूदगी किसी भी ग्रह पर जीवन की संभावना को मजबूत बनाती है ।

इसी वजह से इस खोज को मंगल के इतिहास को समझने के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। यह अध्ययन ब्रिटेन के इम्पीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों की टीम ने किया है। इस रिसर्च के नतीजे जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च प्लैनेट्स में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों ने जेजेरो क्रेटर के एक हिस्से को चुना, जिसे मार्जिन यूनिट कहा जाता है। यहां उन्हें ऐसी चट्टानें और संरचनाएं मिलीं, जो आमतौर पर समुद्र या झील के किनारे बनती हैं। टीम ने पाया कि वहां मौजूद चट्टानों की सतह लहरों की वजह से घिसी हुई लगती है। कुछ जगहों पर पानी के नीचे होने वाले बदलावों के भी संकेत मिले हैं। इससे यह अंदाजा लगाया गया है कि इस इलाके में लंबे समय तक पानी बहता रहा होगा और जमीन के नीचे भी पानी का असर बना रहा होगा।

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अध्ययन के अनुसार वहां पाए गए रेत जैसे गोल दाने बहुत खास हैं। ये दाने ओलिवीन और कार्बोनेट खनिजों से बने हुए हैं। ऐसे दाने आम तौर पर किसी झील या समुद्र के किनारे बनते हैं । वैज्ञानिकों का कहना है कि यह साफ संकेत है कि यह जगह कभी एक तटरेखा थी । शोध की मुख्य लेखक एलेक्स जोन्स के अनुसार पृथ्वी पर भी तटीय इलाके जीवन के लिए अनुकूल माने जाते हैं । उन्होंने बताया कि कार्बोनेट खनिज ऐसे वातावरण की जानकारी को अपने भीतर सुरक्षित रख सकते हैं। इससे भविष्य में मंगल के पुराने हालात को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। यह खोज मंगल के पुराने मौसम और वहां रहने लायक हालात को लेकर नई उम्मीद पैदा करती है।

इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि मंगल पर शांत और स्थिर झील का वातावरण पहले की सोच से कहीं ज्यादा पहले मौजूद था। वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय मंगल का मौसम आज के मुकाबले ज्यादा पृथ्वी जैसा रहा होगा । इस इलाके में जमीन के नीचे पानी का बहाव भी लंबे समय तक चलता रहा। प्रोफेसर संजीव गुप्ता के अनुसार पानी ने चट्टानों को अंदर तक बदल दिया था। पृथ्वी पर ऐसे ही भूमिगत पानी वाले इलाकों में सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों को लगता है मंगल पर भी कभी बहुत साधारण जीवन पनपने की परिस्थितियां हो सकती थीं । यह जानकारी मंगल पर जीवन की खोज को एक नई दिशा देती है । परसिवियरेंस रोवर साल 2021 से जेजेरो क्रेटर में काम कर रहा है । यह रोवर मंगल की मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा कर रहा है। भविष्य में एक अलग मिशन के जरिए इन नमूनों को पृथ्वी पर लाने की योजना है।

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